ये प्रातः तुम्हें सजानी है

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- कविता

ओ भारत की भावी नारी !
बहुत सो चुकी अब तो जागो ,
ये प्रातः तुम्हें सजानी है ।

मत बोझ बनो तुम परिवारों पर
सिर्फ भार बनो मत तुम धरती पर
सीखो मत सिर्फ बंधन में रहना,
लक्ष्य बना लो कुछ करके है दिखलाना
इस युग को प्रतीक्षा सिर्फ तुम्हारी है ।
ओ भारत की भावी नारी …..

क्यों सहती हो कष्टों को तुम ,
क्या सहना ही तुम्हारा जीवन है
कम करो सहनशीलता अपनी ,
भावना लाओ मन में कुछ करने की ,
इस नवयुग को प्रतीक्षा सिर्फ तुम्हारी है
ओ भारत की भावी नारी ….

बहुत रो रही हैे यह भारत माँ तुम्हारी
भ्रष्ट हो रही हैं इसकी संताने सारी
सीता और जीजाबाई जैसी माँ
एक बार फिर बन जाओ तुम
लव कुश और वीर शिवा सी
इनकी सीख सिखाओ तुम ।
इस युग को प्रतीक्षा सिर्फ तुम्हारी है ।

ओ भारत की भावी नारी !
बहुत सो चुकी अब तो जागो
ये प्रातः तुम्हें सजानी है ।
ये प्रातः तुम्हें सजानी है ।

डॉ रीता

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Rita Singh
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नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

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