ये गन्दी राजनीति

ज़ैद बलियावी

रचनाकार- ज़ैद बलियावी

विधा- कविता

ये झूटे वादे रहने दो,
ये झूटी वर्दी रहने दो,,
हम आंसू पीकर भी चैन से जीते,
तुम अपनी हमदर्दी रहने दो,,
बड़ी फैलाई नफरत तुमने,
जात-धर्म के नाम पर,
अब ऐसा करो साहब मुझको तुम,
छोड़ो मेरे हाल पर,,
झाककर देख खुद मे ज़रा,
तेरा ज़मीर तो मुर्दा,,
भारत माता भी तुझपर,
कितना ज़्यादा शर्मिंदा है,,
अब न करो ऐसी सियासत,
जात-धर्म के नाम पर,
अब ऐसा साहब मुझको तुम,
छोड़ो मेरे हाल पर,,
जात-धर्म के नाम पर,
कैसी हमदर्दी दिखलाई है,,
हर जगह पहुँच कर तुमने तो,
बस नफरत ही फैलाई है,,
हम एक साथ रह न सके,
कैसी हमसे ये तिजारत है,
नफरत मे डूबा है मुल्क मेरा,
अल्लाह ये कैसी सियासत है,
बहुत हुई अब तेरी हमदर्दी,
जात-धर्म के नाम पर,
अब ऐसा करो साहब मुझको तुम,
छोड़ो मेरे हाल पर,,,

((((ज़ैद बलियावी)))

Sponsored
Views 210
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
ज़ैद बलियावी
Posts 20
Total Views 2.5k
नाम :- ज़ैद बलियावी पता :- ग्राम- बिठुआ, पोस्ट- बेल्थरा रोड, ज़िला- बलिया (उत्तर प्रदेश). लेखन :- ग़ज़ल, कविता , शायरी, गीत! शिक्षण:- एम.काम.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia