ये इंतजार

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- शेर

दुनिया के अपने रिवाज ओ रवायतें है प्यार करने के,
बस नफ़रत पर कोई पाबन्दी नहीं।
*** ***
बेहिसाब बिजलियों की लपटे अपने दामन में समेटे है,
उसे छुआ भी नही और बेहोश हो गए।
कितने मयखाने उसके लबों पर मुस्कुराते रहते है,
बिना चूमे ही हम मदहोश हो गए।
*** ***
ये इन्तजार, ये रात कभी रुखसत नहीं होंगे इस ज़िन्दगी से,
ये मुकद्दर की बातें है ख़ुदा जाने क्या होगा।
कभी सुबह की चटख धुप भी खिलेगी,
या जाने सिर्फ़ धुँआ धुँआ होगा।
*** ***
हर शख़्स की आँखों में मुर्दापन छाया है,
पता नहीं 'दवे' ये शहर है या शमशान।

Views 27
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
विनोद कुमार दवे
Posts 43
Total Views 3.4k
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia