ये आंखे

pratik jangid

रचनाकार- pratik jangid

विधा- कविता

अन कहे शब्दों को बयां कर जाती हें I
एक अजनबी से ये आंखे न जाने क्या कह जाती हैं I
इक रिश्ता सा बन जाता हें उस अजनबी से I
उस अजनबी को अपना बना जाती है I
न जाने ये आँखे एक अजनबी को क्या कह जाती है I
फिर
हर पल उनकी यादो के बादल गरजते हें I
जब बरसते हें तब ये आँखे नम सी जाती हैं I
फिजाओ के दामन में यादो की लहरे चला करती हें I
जब उस अजनबी की याद बहुत सताती है I
न जाने ये आँखे एक अजनबी को क्या कह जाती है I

Sponsored
Views 21
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
pratik jangid
Posts 18
Total Views 382

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia