*ये आँखें तेरी कत्लखाने से कम नहीं*

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- शेर

18.8.17 **** प्रातः **** 7.58

ये आँखे तेरी किसी कत्लखाने से कम नहीं है

अगर मर जायें तुझपे तो अब हमें ग़म नहीं है ।।

👍मधुप बैरागी

अब मयखाने जाकर मय पीने की तलब किसको है

तेरी आँखों के पयमाने मय- तहख़ाने से क्या कम है ।।

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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