.. या खुदा मेरे सारे गुनाह माफ करे

NIRA Rani

रचनाकार- NIRA Rani

विधा- कविता

शिद्दत से ख्वाहिश है दिल की
खुदा मेरे सारे गुनाह माफ करे

पर गुनाह जो तुझसे हुए
याखुदा उनका कौन हिसाब करे

रिवाजो रस्मो की अाड़ मे
न मालुम कितने दिल सिसक रहे है
क्या पता कौन सी बज्म उन्हे आबाद करे

चिरागे रौशन तो खातिर उजाले के हुआ
क्या हश्र हो जब वही रौशन बर्बाद करे ….
या खुदा मेरे सारे गुनाह माफ करे

Sponsored
Views 38
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
NIRA Rani
Posts 63
Total Views 2.9k
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia