याद करो कुर्बानी

dr. pratibha prakash

रचनाकार- dr. pratibha prakash

विधा- कविता

[8/8, 6:09 PM] Dr Pratibha:
आओ याद करें क़ुरबानी
खोये हमने जो बलिदानी
स्वप्न संजोया अखण्ड भारत
ऐसे महापुरुष त्यागी ज्ञानी
लड़े स्वतंत्रता की खातिर
चढ़े शूली गए काला पानी
मंगल पांडे तांत्या टोपे
लक्ष्मी सी झाँसी की रानी
गांधी आज़ाद सुभाष पटेल
विस्मिल औ भगत जवानी
अशफ़ाक़ सुखदेव राजगुरु
रौशन ने मरने की ठानी
हर बालक अंगार बना जब
बाला ने चण्डी बनने की ठानी
दुर्गा भाभी का त्याग ये कहता
भूल न जाओ दादा की कहानी
बुलन्द हुआ वन्देमातरम था
गूंजी भारत माता की वाणी
ऊधम सिंह कला पहाड़ था
डरते थे जिससे इंग्लिस्तानी
जलियाँवाला बाग का बदला
घर में जा बन्दूक थी तानी
करो याद सीमा पर कितने
वीर जवान हम खोते है
भूल हुई जो वर्षो पहले
आज तक आंसू रोते है
याद करे अब्दुल हमीद को
मरकर थी जीने की ठानी
उनके लिए ही है ये समर्पित
अमर जवान भारत माता के
अमर रहे सदा उनकी जवानी

जय भारत जय माँ भारती

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dr. pratibha prakash
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Dr.pratibha d/ sri vedprakash D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p. M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु गॉड कहा गया है की कृपा से आध्यात्मिक शिक्षा के प्रशिक्षण केंद्र में प्राप्त ज्ञान सत्य और स्वयं को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ।
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