याद आकर रोज रातों को मुझे जगाया मत कर,

kapil Jain

रचनाकार- kapil Jain

विधा- गज़ल/गीतिका

याद आकर रोज रातों को मुझे जगाया मत कर,
रोतें हैं जाने के बाद तेरे,इतना मुझे हँसाया मत कर ।

तेरे होने से आसमान में उड़ती है उम्मीदें मेरी,
होकर खफा इन्हें जमीन पे गिराया मत कर,
याद आकर रोज रातों को मुझे जगाया मत कर ।

तुझे भनक तक नही है हमारे दर्द की
यूं घाव कुरेतकर फिर मलहम लगाया मत कर,
याद आकर रोज रातों को मुझे जगाया मत कर ।

कपिल जैन

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kapil Jain
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नाम:कपिल जैन -भोपाल मध्य प्रदेश जन्म : 2 मई 1989 शिक्षा: B.B.A E-mail:-kapil46220@gmail.com

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