यादों के झरोखे से

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

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तामीर के रौशन चेहरे पर तख़रीब का बादल फैल गया ।
आमद हुई क्या अश्कों की आँखों का काजल फैल गया ।
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भूल चुका था मांझी को पर आज जो देखा उसको मैं
इक तीर लगी इस सीने में दिल ये घायल फैल गया
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घूम उठे हैं आँखों में गुज़रे दिनों के वो मंज़र
खोने लगा फिर चैन मिरा यादों का संदल फैल गया
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साथ हमारे चलते थे "प्रीतम" बनके हमसाया
उस आज़ सुहानी राहों में ग़म का जंगल फैल गया

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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