यादों की गठरी

NIRA Rani

रचनाकार- NIRA Rani

विधा- कविता

सपनो के ताने बाने है
कुछ अरमान पुराने है
इक यादों की गठरी है
जिसमे जज्बात पुराने है
कुछ वादो की टूटन है
कुछ ख्वाबों की किरचन है
सब देख समझ कर रख लेना

कुछ नमी लगे तो रो लेना
यादो की गठरी तुम तक लेना
मै वहीं कहीं दिख जाउंगी
तुम अश्को से मुँह धोगे जब
मै ऑखो से बह जाउगी

वक्त विमुख है सह लेना
यादों की सिलवट तह लेना
जब सारा जग सो जाएगा
जब चंदा भी आ जाएगा
तुम बाट ख्वाब के जोह लेना
मै वही तुम्हे मिल जाउंगी
चिर तुममे मै खो जाउंगी
मै वही तुम्हे मिल पाउंगी

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NIRA Rani
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..

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