यादें

Ramesh chandra Sharma

रचनाकार- Ramesh chandra Sharma

विधा- कविता

तेरी यादों की गठरी को सुलगता छोड़ आया हूँ
कभी जो ख्वाब था देखा सिसकता छोड़ आया हूँ।
हमारा दिल जो बच्चा था अभी घुटनों ही चलता है
उसे मैं घर के आँगन में सुबकता छोड़ आया हूँ ।–आरसी

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Ramesh chandra Sharma
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गीतकार गज़लकार अन्य विधा दोहे मुक्तक, चतुष्पदी ब्रजभाषा गज़ल आदि। कृतिकार 1.अहल्याकरण काव्य संग्रह 2.पानी को तो पानी लिख ग़ज़ल संग्रह आकाशवाणी कोटा से काव्य पाठ कई साहित्य सम्मान एवं पुरुस्कारों से सम्मानित

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