यह नगरी है (५)

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- कविता

यह नगरी है ,
नेताओं की , आकाओं की ।
बस-स्टेंड इनके पापा का ,
जिसे बनाया इनने दफ़्तर ।
लंबी ऊंची पहुंच बताकर ,
ख़ुद ही ख़ुद को कहते बेहतर ।
चौराहा इनके दादा का ,
जिस पर ये अनशन करते हैं ।
गलियों में ग़ुर्गे फैले हैं ,
जो इनका ही दम भरते हैं ।
भाषा इनकी शब्द किसी के,
व्याकरण इनका अपना है ।
संज्ञा से ये रोज़ खेलते ,
कारक आगे का सपना है ।
ये जनता के उद्घारक हैं ,
आपदाओं के ये कारक हैं ।
पढ़े , अधपढ़े और निठल्ले ,
इनकी सेना में शामिल हैं ।
बेमौसम जो बढ़े अचानक ,
अमरबेल की शाखाओं की ।
यह नगरी है ,
नेताओं की , आकाओं की ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

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