यही है हकीक़त

Ananya Shree

रचनाकार- Ananya Shree

विधा- कविता

कहीं झूठ है बेबसी
और कहीं लाचारी है
भष्टाचारी की थाली में
उन्नति बनी बीमारी है
लेन देन की बात चली है
दुखिया का सर्वस्व छली है
नौकरी के बदले में अस्मत
गहरी चोट ……..करारी है
नोट के बदले वोट बिके है
नेता हर चौखट दिखे है
बहुमत की ….तैयारी है
खूब मनाओ आजादी को
रंग चढ़ाओ बर्बादी को
बलि इसे भी प्यारी है
हर तरफ लाचारी है
हर तरफ दुश्वारी है

अनन्या "श्री"

Views 13
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Ananya Shree
Posts 10
Total Views 239
प्रधान सम्पादिका "नारी तू कल्याणी हिंदी राष्ट्रीय मासिक पत्रिका"

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia