म्हारी होळी

सतीश चोपड़ा

रचनाकार- सतीश चोपड़ा

विधा- कविता

म्हारी होळी
होळी तो सै त्योंहार रंगां का
फाग भाभी गेल्याँ खेलण का
सारा साल हाम देखा बाट
कद आवै मिहना फागण का

भाभी नै भेवण का चा देवर नै
ना डर कती कोर्डयां का हो सै
बेशक लील गात पै पड़ ज्या
ना डर कै पाछे हटणा हो सै
न्यारा ए मजा आवै सै खा कै
दस बीस कोरडे नाटण का

कदे ओळे अर कदे सोळे आवें
वा मारै आखर जोर लगा कै
देही में जब सरणाटा सा होवै
वा मारै जब लाम्बा हाथ बढ़ा कै
टोवै खूब किसे नै पाता कोन्या
रास्ता फेर किते भी भाजण का

रंग गेर दे अर गुलाल भी लगा दें
किसे चीज का परहेज कोन्या
पाणी में ये भाभी नै तर कर दें
शीळा का भी परहेज कोन्या
टेम भी भाभी नै मिलता कोन्या
हो कैं खड़ी कूण में कापण का

सारा दिन सब करैं मस्ती खूब
धमाचौकड़ी सारा गाम मचावै
बैर विरोध रवैह ना याद किसे कै
इसा गजब का हाम सांग जमावै
खेली जो जम कै उस भाभी नै
मजा लाडू रात नै बाटण का

होळी तो सै त्योंहार रंगां का
फाग भाभी गेल्याँ खेलण का
सारा साल हाम देखा बाट
कद आवै मिहना फागण का

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सतीश चोपड़ा
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नाम: सतीश चोपड़ा निवास स्थान: रोहतक, हरियाणा। कार्यक्षेत्र: हरियाणा शिक्षा विभाग में सामाजिक अध्ययन अध्यापक के पद पर कार्यरत्त। अध्यापन का 18 वर्ष का अनुभव। शैक्षणिक योग्यता: प्रभाकर, B. A. M.A. इतिहास, MBA, B. Ed साहित्य के प्रति विद्यालय समय से ही रुझान रहा है। विभिन्न विषयों पर लेख, कविता, गजल व शेर लिखता हूँ। कलम के माध्यम से दिल की आवाज दिलों तक पहुँचा सकूँ इतनी सी चाहत है।

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