मौलिक कवि हूँ मित्रों दिल के भाव लिखता हूँ ।

Ashish Tiwari

रचनाकार- Ashish Tiwari

विधा- मुक्तक

मौलिक कवि हूँ मित्रों दिल के भाव लिखता हूँ ।
रिसते पुराने जो भि मेरे घाव लिखता हूँ ।।
नदियाँ, तालाब, पेड़, पौधे है मुझे प्यारे ,
रहता शहर में हूँ भले मै गाँव लिखता हूँ ।।

करीब था क़रीब हूँ क़रीब रहूँगा !!
हबीब था हबीब हूँ हबीब रहूँगा !!
दिल में बसे हो आप सुगंध की तरह,
तब से मै खुशनशीब खुशनशीब रहूँगा !!

जो भी दिया प्रभु ने मुझको कम नहीं दिया !
खुशियाँ भरी है जिन्दगी में गम नहीं दिया !!
अहसानमंद हूँ मैं उस परवरदिगार का ,
सोला दिया खुदा ने पर शबनम नहीं दिया !!

आप यूँ हँसते रहो तो गीत गाऊँगा !
शब्द गंगाजल सा मै पुनीत गाऊँगा !!
दिल में मेरे दर्द है तो क्या हुआ जुगनू ,
गुजरा ज़माना याद है अतीत गाऊँगा !!

पी कर दूध नागो की तरह डसना नहीं आया !
फरेबी मित्र से यारों मुझे बचना नहीं आया !!
भुलाकर मान मर्यादा किया सबका चरण बंदन ,
वो आगे बढ़ गया मुझसे मुझे बढ़ना नहीं आया !!

Sponsored
Views 16
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Ashish Tiwari
Posts 45
Total Views 2.8k
love is life

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia