मौत तो सबको एक दिन आती है

संतोष भावरकर नीर

रचनाकार- संतोष भावरकर नीर

विधा- कविता

" मौत तो सबको एक दिन आती हैं"

हर सुबह एक नया पैगाम लाती है !
ज़िंदगी तो यूँ पल में गुज़र जाती है !!

पल की क्या होती है क़ीमत यारो !
वो तो ज़िंदगी ही हमें समझाती है !!

बादशाह हो वो या हो फिर फ़क़ीर !
मौत तो सबको एक दिन आती हैं !!

अपने दर्द को खुद सहना होगा तुझे !
ये काया संग किसी के नही जाती हैं!!

चलना उसी की मर्जी से होगा "नीर"!
ज़िंदगी ही सब कुछ हमें सिखाती है !!

संतोष भावरकर "नीर"
गाडरवारा (म.प्र.)

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 239
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia