*मौत के डर से मर जाया नही करते इंसान*

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- मुक्तक

वक्त कब किसी पे रहम करता है

सम्भालों

जीना है जहां में यारों

जिंदगी
कब कहती है मर मर के जिओ

मौत
कब कहती है जीते जी मर जाओ

रहम कर
जिंदगी पे अपनी जिन्दा इंसान

मौत के डर से

मर जाया नहीं करते इंसान ।।
. 👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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