मोहे प्रीत के रंग रंगना

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- कविता

रंग से नही रंगना,
सजन मोहे अपने रंग में रंगना !
कच्चे रंग दिखावे के,
मोहे प्रीत के पक्के रंग रंगना !!
!
बारह महीनो चढ़ा रहे,
मोहे फाग के रंग में रंगना !
सावन भादो हरा रहे
मोहे ऐसे रंग में तुम रंगना !!
!
ज्यो – ज्यो चढ़े,
बैसाख – ज्येष्ठ की दुपहरी !
तपती धरती में,
हो जाये मेरा रंग भी पक्का !!
!
पूस – माघ की सर्दी में,
जम जम जाये, रंग हो ठंडा !
हर मास असर दिखाये,
सजन मोहे ऐसे रंग में रंगना !!
!
रंग से नही रंगना,
सजन मोहे अपने रंग में रंगना !
कच्चे रंग दिखावे के,
मोहे प्रीत के पक्के रंग रंगना !!
!
!
!
डी. के. निवातिया

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

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