मोहन तुम थे एक मुसाफिर

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- गीत

मोहन तुम थे एक मुसाफिर
हमको कभी नहीं ज्ञान हुआ ,
इक दिन तुमको जाना होगा
इसका तनिक नहीं भान हुआ ।

नँदबाबा ने गोद खिलाया
मैया से ममता पान हुआ
माखन ग्वालिन का चुराया
गोपिन सँग रास महान हुआ ।

प्रेम राधिका ने बरसाया
तू कृष्णा मीत जहान हुआ
सुदामा मित्र रूप में भाया
मित्रता का भी सम्मान हुआ ।

चौरासी कोस का बृजमँडल
तुम्हारा लीला स्थान हुआ ।
तुम सा मुसाफिर मिला बृज को
जिससे यह पावन धाम हुआ ।

डॉ रीता

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Rita Singh
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नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

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