मोरे घनश्याम

दिनेश एल०

रचनाकार- दिनेश एल० "जैहिंद"

विधा- अन्य

मोरे घनश्याम

दरश दिखा के
प्यास जगा के
कुछ क्षण मोरे
संग बीता के शाम !

मुझ विरहन को
तू छोड़ अकेला
कौन देस गया
हे मोरे घनशाम !

मैं पल-पल जलूँ
ना जिऊँ ना मरूँ
ढड़े नैनों से नीर
मन को ना आराम !

कजरा संग अँखियां
बिंदिया संग लिलरा
वेणी संग मोर जूड़ा
निक लागे नाहिं राम !

तुझ संग सब निक लागे
सब हौं अब तो अभागे
काहे का करूँ मो सिंगार
कौन नाहिं इनके दाम !

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दिनेश एल० "जैहिंद"
06. 02. 2017

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दिनेश एल०
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मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का अंग बना लिया और निरंतर कुछ न कुछ लिखते रहने की एक आदत-सी बन गई | फिर इस तरह से लेखन का एक लम्बा कारवाँ गुजर चुका है | लगभग १० वर्षों तक बतौर गीतकार फिल्मों मे भी संघर्ष कर चुका,,

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