मोती बनते ओस के , जब रोती है रात

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- कुण्डलिया

मोती बनते ओस के , जब रोती है रात
पी लेता सूरज उन्हें , समझ एक सौगात
समझ एक सौगात,रहे व्याकुल गर्मी से
संध्या में ही पेश, जरा आता नर्मी से
सुबह अर्चना रोज , धूप के दाने बोती
तभी बिखेरे रात ,ओस के देखो मोती

डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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