मोतियों की सुनहरी माला

DESH RAJ

रचनाकार- DESH RAJ

विधा- कविता

मत तोड़ो मोतियों की सुनहरी माला बिखर जाएगी ,
फिर अगर बिखर गई तो कभी भी नहीं जुड़ पायेगी I

सुंदर फूलों की इस बगिया में काँटों का व्यापार करने है चले,
प्यारे फूल के पौधों को रौंदकर फूलों का व्यापार करने है चले,
प्यार की इस बगिया में नफरत का पौधा लगाने को है चले ,
खौफ नहीं है “मालिक” का कफ़न का कारोबार करने चले,

मत तोड़ो मोतियों की सुनहरी माला बिखर जाएगी ,
फिर अगर बिखर गई तो कभी भी नहीं जुड़ पायेगी I

खूबसूरत बड़े आलीशान महल, किले सभी खंडहर में तब्दील हो गए,
बड़े-2 राजा, बादशाह, उनकी हुकूमत सब इसी मिट्टी में मिल गए ,
सोना ,चांदी, हीरे-मोती ,शान ए शौकत, जमीं पर धरे के धरे रह गए ,
क्या पाया जीवन में ? क्या खोया जीवन में ? हम बस सोचते रह गए I

मत तोड़ो मोतियों की सुनहरी माला बिखर जाएगी ,
फिर अगर बिखर गई तो कभी भी नहीं जुड़ पायेगी I

माँ भारती की करुण पुकार :

मेरी इस धरा पर न कोई हिन्दू बड़ा , न कोई बड़ा मुसलमान,
मेरी इस प्यार की सुंदर बगिया में वह ही बड़ा जो है एक इंसान ,
मेरे आँगन में प्यार के दो फूल खिला दो तब ही बनूंगी मैं महान ,
“माँ भारती” की हर सांस में बसती है हर एक भारतीय की जान ,
“राज” हर भारतीय को गले लगा ले ,“माँ भारती”का बढ़ेगा मान I
*****
देशराज “राज”
कानपुर I

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