मॉ

bharat gehlot

रचनाकार- bharat gehlot

विधा- कविता

मॉ ममता की खाॅन है,
मॉ गीता और कुरान है,
मॉ धरती पर परमपिता की पहचान है,
मॉ प्रथम गुरू पाठशाला हैं,
मॉ जगती में बच्‍चे की पहचान है,
माॅ बिलखते होठो पर खिलखिलाती मुस्‍कान है,
मा्ॅ हसते बच्‍ापन की पहचान है,
माॅ बच्‍चे की सुर और तान है,
मा बच्‍चे का छोटा सा आसमा है,
मा मंगलमय गान है,
मत भेज ऐ इंसान माॅ को व‍‍िधवाश्रम में
मॉ के बिना तेरा यह घ्‍ार श्‍मशान के समान हैौ

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bharat gehlot
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