मॉ की कोख मैं मुझे न मारो

अरविन्द राजपूत

रचनाकार- अरविन्द राजपूत "कल्प"

विधा- कविता

पापा मेरे प्यारे पापा,
मुझे अपना लो पापा जी ।
मां की कोख में मुझे न मारो,
मुझे बचा लो पापा जी ।।
मुझको तुम दुनिया दिखला दो,
मेरे प्यारे पापा जी…

मां की गोद का बनू खिलौना,
उंगली पकड़ो पापाजी ।
भाई की जूठन खा कर के,
अपनी भूख मिटा लूंगी ।
पहन के उतरन भैया की मैं,
अपना काम चला लूंगी ।।
पापा मेरे प्यारे पापा…

चौका चूल्हा रोज करूंगी,
फिर भी अब्बल आऊंगी ।
रोशन आपका नाम करुंगी,
मुझे पढ़ा दो पापा जी ।।
इज्जत कभी न जाने दूंगी,
वचन हरा लो पापा जी ।।
पापा मेरे प्यारे पापा…

ऐश्वर्या सा रूप धरूंगी,
बनू सानिया मिर्जा सी ।
जब काम ना आए कोई सपूत,
तब ओलंपिक मैं जाऊंगी ।
साक्षी सिंधु बनकर पापा,
देश का मान बढ़ाऊंगी ।।
पापा मेरे प्यारे पापा…

सीता सम आदर्श निभाऊं ।
करूं तपस्या मीरा सी।
अनुसुईया सा सोम्य धरूंगी,
बन राधा श्याम नचाऊंगी ।।
शबरी बनकर प्रेम परोसूं ,
भोजन करना पापाजी ।।
पापा मेरे प्यारे पापा…

बनू किरण में उम्मीदों की,
घर रोशन कर जाऊंगी ।
इंद्रा सी प्रखरमुख होकर,
दुनिया पर छा जाऊंगी ।
सुषमा सा स्वराज कर दूंगी,
मेरे प्यारे पापा जी ।
पापा मेरे प्यारे पापा…

सरस्वती की वीणा बनकर,
स्वर सरगम में गाऊंगी ।
बनु लक्ष्मी दो-दो कुल की,
दरिद्रता दूर भगाऊंगी ।
झांसी की रानी बन कर के,
दुश्मन को सबक सिखाऊंगी ।
पापा मेरे प्यारे पापा…

प्रलय काल में प्यारे पापा,
मैं शक्ति बन जाऊंगी ।
दुर्गा काली का रूप धरू,
महिषासुर मर्दिनी कहलाऊंगी ।।
जगत जननी बनकर के पापा,
मैं सृष्टि सौम्य रचाऊंगी ।
पापा मेरे प्यारे पापा…

सुनलो दुनिया के सारे पापा,
बेटी को अपनाना तुम ।
बेटा -बेटी में भेद न करना,
समरसता देखलाना तुम ।
बेटी से ही दुनिया चलती,
इस बात को भूल ना जाना तुम।
पापा मेरे प्यारे पापा…

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अरविन्द राजपूत
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अध्यापक B.Sc., M.A. (English), B.Ed. शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय साईंखेड़ा

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