मै वो वेश्या हूँ/मंदीपसाई

Mandeep Kumar

रचनाकार- Mandeep Kumar

विधा- कविता

तन की मेरी बोली लगाई जाती,
गैरो के बिस्तर पर सजाई जाती।
में वो वेश्या हूँ……

चंद पैसे दे कर खरीदा जाता,
बेहरमी से मुझे नोचा जाता।
मै वो वेश्या हूँ……..

आते पास मेरे समाज के देकेदार,
करते वो भी मेरा बलत्कार।
मै वो वेश्या हूँ……..

देख रही आया नही आज कोई,
जलेगा कैसे चुला में सोच कर बहुत रोई।
मै वो वेश्या हूँ……..

आये दिन में अपना बलत्कार करवाती,
तुम्हारी बेटियो को बलत्कार से मै बचाती।
मै वो वेश्या हूँ……..

मंदीपसाई

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Mandeep Kumar
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नाम-मंदीप कुमार जन्म-10/2/1993 रूचि-लिखने और पढ़ाने में रूचि है। sirmandeepkumarsingh@gmail.com Twitter-@sirmandeepkuma2 हर बार अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ। और रही बात हम तो अपना दर्द लिखते है।मेरा समदिल मेरे से खुश है तो मेरी रचना उस के दिल का बखान करेगी।और जब वो रूठता है तो मै मेरे दिल का बखान करूँगा।हा पर बहुत अच्छा है वो और मेरे दिल में उस के लिए खास ही जगह है ।जहाँ तक कोई पहुँच भी नही पायेगा। मेरा दिल जरूर दुःखता है पर मेरा दिल उसे बार बार माफ़ कर देता है।

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