मै तो एक एतवार था ।

satyendra kumar

रचनाकार- satyendra kumar

विधा- कविता

मै एक एतवार था
अन्य दिनो के गले का हार था
बच्चे जिसका करते थे इंतजार
मै वो हफ्ते का त्यौहार था
मै एक एतवार था।

कि जब मै था
नींदे जल्दी खुला करती थी
और फिर बिस्तर पर ही
भैया संग कुश्ती हुआ करती थी
सूरज भी होता था जिस दिन
कल से थोड़ा ज्यादा पीला
मै वो एतवार था।

अम्मा डालकर धनिया
मूंग के पकौड़े तला करती थी
पापा के संग बरामदे मे
बैडमिंटन मे जोड़ी जमा करती थी
धरती आसमान का सुख
मेरी झोली मे होता था जिस दिन
मै वो एतवार था ।

नींद आज खुलती देर से
जल्दी जल्दी फ्रेस हो लेता हूँ
मम्मी थोड़ा काम बाकी है
आकर खाना खाता हूँ
भागदौड़ ने बना दिया है
रविवार जैसा मुझको अब
मै तो एतवार था ।

© सत्येंद्र कुमार
satya8794@gmail.com

Sponsored
Views 31
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
satyendra kumar
Posts 15
Total Views 203
मै जिला फ़तेहपुर उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ । उम्र 21 वर्ष है। साहित्य मे कविता, गीत और गजल ज्यादा पसंद है। email. --- satya8794@gmail.com mob. ---- 9457826475

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia