*****मैं हूँ मात्रिक छंद*** दोहा*****

Neeru Mohan

रचनाकार- Neeru Mohan

विधा- कविता

**काव्य का है छंद कहलाता ,
मात्राओं पर आधारित गुण दर्शाता |
मात्रिक छंद की आभा लिए ,
दो पंक्तियों में लिखा है जाता |

**दो चरण हर पंक्ति में आते ,
चार चरण जब पूरे हो जाते |
मात्रिक छंद तब पूर्ण कहलाता ,
तभी वह दोहा कहा है जाता |

**प्रत्येक चरण के बाद विराम है आता,
अल्प विराम का चिन्ह लग जाता |सार्थक वह तभी कहलाता,
जब दूसरे और चौथे चरण में तुकांत को पाता |

**तेरह मात्राओं से पूर्ण होकर
पहला और तीसरा चरण सार्थक हो जाता |
ग्यारह मात्राओं से बंध जाने पर दूसरा और चौथा चरण बनाता |

**चौबीस मात्राएँ पूरी होने पर दोहा अर्थ पूर्ण बन जाता |
मात्रिक छंद की शोभा है वह पाता
हर वाणी पर राज रजाता |

Views 41
Sponsored
Author
Neeru Mohan
Posts 49
Total Views 1.9k
व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र बी एड - हिंदी , सामाजिक विज्ञान एम फिल - हिंदी साहित्य कार्य - शिक्षिका , लेखिका
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia