मैं हिंदी -हिन्दी

डॉ मधु त्रिवेदी

रचनाकार- डॉ मधु त्रिवेदी

विधा- कविता

मैं हिंदी – हिंदी
✍✍✍✍

मै हिन्दी हिन्दी गाऊँ
विश्व गुरू कहलाऊँ
मै हिन्दी हिन्दी गाऊँ
कुछ कह कर इतराऊँ
मैं हिन्दी हिन्दी ——-

मैं हिंदी हिंदी बोलूँ
भाषा की परतें खोलूँ
मैं हिन्दी हिन्दी बोलूँ
मन के भेद सब खोलूँ
मैं हिन्दी हिन्दी ——–

हिन्दी हिन्दी चिल्लाऊँ
सबकी कह सुन आऊँ
जग जाहिर कर आऊँ
सबकी पीडा हर लाऊँ-
मै हिन्दी हिन्दी ——–

माता माता मैं बोलूँ
सबको शब्दों में तौलूँ
अप्पा पप्पा मैं बोलूँ
सबके मन को हर लूँ
मै हिन्दी हिन्दी ——

हिन्दी में ही जन्मा
हिन्दी में ही कर्मा
हिन्दी में ही खेला
हिंदी मे ही भूला
मै हिन्दी हिन्दी ——-

हिन्दी में ही जागा
हिन्दी में ही खेला
हिन्दी हिन्दी बोला
हिन्दी में ही डोला
मैं हिन्दी हिन्दी ———

हिन्दी मे ही सम्मान
हिन्दी में ही अपमान
हिन्दी में ही आये हो
हिन्दी में ही जाओगे
मै हिन्दी हि————

हिन्दी में धीरेधीरे युवा
हिन्दी में ही प्रेम हुआ
प्यार की बतियाँ गाई
गलियों में वो आई
मै हिन्दी हिन्दी ———

हिन्दी में प्रथम प्रेम
हिन्दी में सजा चुम्बन
अब मेरे तेरे दो है
वो भी हिन्दी हिन्दी है
मै हिन्दी हिन्दी ——-

चारों धाम कर आओ
हिन्दी हिन्दी चिलाओ
मैं हिन्दी की डोर हूँ
सबके लिए चित्त चोर हूँ
मै हिन्दी हिन्दी ———

डॉ मधु त्रिवेदी

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