मैं लिखता हूँ तुम्हारी खातिर,

Sahib Khan

रचनाकार- Sahib Khan

विधा- कविता

मैं लिखता हूँ तुम्हारी खातिर,
तुम जान हो मेरी,
मैं शायर हूँ तो क्या,
तुम पहचान हो मेरी,
सहर तुम्हारी याद से होती है,
तुम ही शाम हो मेरी,
तुमसे मुलाकात हो तो कोई प्यास नही होती,
तुम जान हो मेरी,
"साहिब" कोई लूट ना जाए हुमको,
तुम ही आन हो मेरी,

Views 12
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Sahib Khan
Posts 37
Total Views 215

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia