मैं लाचार द्रोपदी नही…..पुकारूँगी

Dinesh Sharma

रचनाकार- Dinesh Sharma

विधा- कविता

मैं विघ्न बिंघनेश्वरी हूँ
मैं कोई लाचार कुचली डरपोकनी
नहीं हूँ
मुझे अंधे राज की द्रोपदी न समझना
कि पुकारूगी लाचार सी
इस दुःशासन के सामने
अब राज अँधा ही नही
गूंगा भी है बहरा भी,
कई शक्लो में दुःशासन भी
काट डालूंगी बुरी नजर को
मैं कालो की काल कालेश्वरी हूँ
जंगली भेड़िये कूद रहे सिंहासन पर,
हैवानियत नंगा नाच रहा,
कूचे कूचे गलियों में
किन्तु मैं न अब डरती,अब न मरती
अब मार डालूंगी काट डालूंगी
लाचार द्रोपदी नही…पुकारूँगी
मैं सक्षम हूँ मैं शक्ति हूँ मैं साक्षात् दुर्गा हूँ
शेर पर सवार,सब देव है पक्ष में मेरे,
मैं नारी हूँ सम्मान पर, बरसाती हूँ प्यार का झरना
दरिया दिल से….
मैं पवित्रता हूँ देखो मुझे पवित्र दृष्टि से…
समर्पण का भाव है मेरा,सेवा की मूर्ति हूँ मैं,
बस सम्मान इज्जत की भूखी हूँ मैं
मैं सरल सहज कोमल सी नारी भी हूँ मैं
पर लाचार द्रोपदी नही….पुकारूँगी।।

^^^^दिनेश शर्मा^^^^

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Dinesh Sharma
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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।

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One comment
  1. छोटी सी खूबसूरत लाईन :
    “जब से परीक्षा वाली जिंदगी पूरी हुई है,
    तब से जिंदगी की परीक्षा शुरु हो गई है..
    आज मुझे एक नया अनुभव हुआ
    अपने मोबाइल से अपना ही नंबर लगाकर देखा, आवाज
    आयी
    The Number You Have Call Is Busy…..
    फिर ध्यान आया किसी ने क्या खुब कहा है….
    “औरो से मिलने मे दुनिया मस्त है पर,
    खुद से मिलने की सारी लाइने व्यस्त है..
    कोई नही देगा साथ तेरा यहॉं
    हर कोई यहॉं खुद ही में मशगुल है
    जिंदगी का बस एक ही ऊसुल है यहॉं,
    तुझे गिरना भी खुद है
    और संभलना भी खुद है..?
    😊😊😊