मैं यूँ तो “भीष्म प्रतिज्ञ” नहीं !

Neeraj Chauhan

रचनाकार- Neeraj Chauhan

विधा- कविता

मैं यूँ तो "भीष्म प्रतिज्ञ" नहीं, जो वचनों पर डटता आता ..
हाँ केशव सी निश्छलता में, ख़ुद को उसके सम्मुख पाता.
है अर्जुन जैसा ध्यान नहीं, जिसने था अविचल मन पाया,
मैं सपनों को बुनता आया, वो लक्ष्यों को धुनता आया .. .

– नीरज चौहान

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Neeraj Chauhan
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कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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