मैं मिलन गीत लिख-लिख के गाता रहा…

तेजवीर सिंह

रचनाकार- तेजवीर सिंह "तेज"

विधा- गीत

🌹विधा – गीत 🌺 विषय – मिलन 🌹
🌻लय – स्वतन्त्र🌻
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अक्स दिल में बसा और लुभाता रहा।
एक तूफान सा आता – जाता रहा।
मेरे ख्वाबों – खयालों में थीं तुम ही तुम।
मैं *मिलन-गीत* लिख-लिख के गाता रहा।

इश्क़ नदिया के हम तुम किनारे हुए।
बन चकोरी-से चन्दा के प्यारे हुए।
इश्क़ की इन्तेहा हो गयी इस क़दर।
एक दूजे के दोनों सहारे हुए।
घाव दिल का ये मुझको सताता रहा।
मैं *मिलन गीत* लिख-लिख …..

दिल में जज़्बात का अब न रेला रहा।
जिंदगी में न यादों का मेला रहा।
तुम हुए दूर हमसे तो बरपा क़हर।
भीड़ में भी ये दिल तो अकेला रहा।
मेरे दिल को यही रंज खाता रहा।
मैं *मिलन गीत* लिख-लिख…..

तुम हो झरना तो जाओ नदी बन बहो।
इस महब्बत की मजबूरियां क्यों सहो।
दिल से अब भी निकलती है ये ही दुआ।
तुम जहां भी रहो प्यार से खुश रहो।
नाम होठों पे बस ये ही आता रहा।
मैं *मिलन गीत* लिख-लिख …..

हमको दीवानेपन का गुमां हो गया।
चाँद में तेरा चेहरा नुमां हो गया।
सुरमई साँझ में खिल गई चांदनी।
देख लो कितना क़ातिल समां हो गया।
*तेज* सुर में तुझे गुनगुनाता रहा।
मैं *मिलन गीत* लिख-लिख के गाता रहा।

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🙏तेज 20/04/17✍

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तेजवीर सिंह
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नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती शारदा देवी शिक्षा - एम.ए.(द्वय) बी.एड. रूचि - पठन-पाठन एवम् लेखन निवास - 'जाट हाउस' कुसुम सरोवर पो. राधाकुण्ड जिला-मथुरा(उ.प्र.) सम्प्राप्ति - ब्रजभाषा साहित्य लेखन,पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन तथा जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन कार्य।

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