” मैं पुष्प बनना चाहता हूँ “

अमित नैथानी 'मिट्ठू'

रचनाकार- अमित नैथानी 'मिट्ठू'

विधा- अन्य

मैं पुष्प बनना चाहता हूँ,
मैं प्रकृति के रंगों में रंगना चाहता हूँ ,
सौन्दर्य का प्रतीक बनकर मैं अपनी सुन्दरता बिखेरना चाहता हूँ ,
काँटों के बीच रहकर भी मैं खिलना चाहता हूँ ,
जी हाँ , " मैं पुष्प बनना चाहता हूँ " ।

मैं प्रेमी युगल की पहली मुलाकात का हिस्सा बनना चाहता हूँ ,
मैं सुहागन के केशों में लिपटा हुआ गजरा बनकर,
उसकी सुन्दरता बढ़ाना चाहता हूँ ।
मांगलिक सुअवसरों पर मैं अपनी उपस्तिथि देना चाहता हूँ,
जी हाँ , " मैं पुष्प बनना चाहता हूँ " ।

मूर्तियों को मस्तक से चरणों तक मैं अलंकृत करना चाहता हूँ ,
हर मन्दिर हर दरगाह में समर्पण होना चाहता हूँ,
हर मजहब में मैं आस्था का प्रतीक बनना चाहता हूँ ,
मैं नफरत की भावना को प्रेम में बदलना चाहता हूँ
जी हाँ, " मैं पुष्प बनना चाहता हूँ " ।

मैं शिशु के जन्म पर बरसना चाहता हूँ ,
मैं वर-वधु के मिलाप का साक्षी बनना चाहता हूँ ,
अपने आशियाने में भँवरों का मधुर संगीत सुनना चाहता हूँ ,
कुचले जाने से पहले मैं किसी को सम्मानित करना चाहता हूँ ,
जी हाँ , " मैं पुष्प बनना चाहता हूँ ।

भाष्कर की किरणों के साथ अपने दिन की शुरुआत करना चाहता हूँ ,
मैं खिलना चाहता हूँ , मैं महकना चाहता हूँ ,
जानता हूँ पुष्प बनकर कुछ दिनों का जीवन होगा मेरा,
लेकिन इन कुछ दिनों में ही मैं सबकी पसंद बनना चाहता हूँ ,
जी हाँ , " मैं पुष्प बनना चाहता हूँ ।

– अमित नैथाणी 'मिट्ठू' ( अनभिज्ञ )

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अमित नैथानी 'मिट्ठू'
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मैं अमित नैथानी (मिट्ठू) उत्तराखण्ड राज्य के जनपद पौड़ी गढ़वाल का निवासी हूँ । ठुमरी, गजल, भजन, सुनना तथा आध्यात्म विषय पर पढने और लिखने का शौक है । शैक्षिक योग्यता- उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार से आचार्य (M.A.) - नव्यव्याकरण । वृन्दावन ( उ.प्र.) से श्री ऋषि पाठक जी द्वारा शास्त्रीय संगीत की दीक्षा प्राप्त की ।

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