मैं, ने ही मैं को मारा है

Bhupendra Rawat

रचनाकार- Bhupendra Rawat

विधा- कविता

मैं, ने ही मैं को मारा है
हम, ही तो रहा शेष रहा सारा है

मैं, ने ही तो मैं का संहार किया
हम, ने ही तो मिलकर सबका उद्धार किया

मैं, ने ही तो रावण को बर्बाद किया
हम, ने ही तो सबको आबाद किया

मैं, ही तो रावण को हर गया
हम, से ही तो जीवन बढ़ गया

मैं, ने ही तो इंसा को शैतान किया
हम, ने ही तो शैतान को इंसान किया

मैं, ने ही तो जीवन को निष्फल किया
हम, ने ही तो जीवन में मीठा फल दिया

मैं, कहाँ स्वयं को बचा पाया है
हम, है तब ही तो जीवन बच पाया है

मैं,ने ही तो मैं को झुकाया है
हम, ने ही तो उठाना सीखाया है

भूपेंद्र रावत
18/08/2017

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Bhupendra Rawat
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M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।

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