मैं नारी हूँ

डॉ मधु त्रिवेदी

रचनाकार- डॉ मधु त्रिवेदी

विधा- कविता

मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ
रात के अधेरों में कोई अपना आवाज लगाता है ।
शान्त चित्त से मेरे मन को बर बस लुभाता है।।
शायद किसी सहायता की आस मुझसे लगाता है।
मैं राम की तरह अहिल्या का उद्वार नही कर सकती ॥

मैं नारी हूँ
नारी हूँ बरसों से पर पुरूष की सताई हुई अबला हूँ।
ऊपर से उत्थान की बातें तो बहुत सुनाई देती है॥
बहुत सारे आयोग भी रोज देश में बना करते है।
महिला आयोग भी अपनी खिचडी पकाया करते है॥

मैं नारी हूँ
इतिहास उठा कर जरा देखो देश के भावी कर्णधारों।
वैदिकयुग से आधुनिक काल तक सँवारी गयी मै॥
गार्गी अपाला इन्दिरा अनेकानेक पदों पर आसीन मैं।
कल्पना सुनीता विलियम्स की अनेकों यात्रा मैं॥

मैं नारी हूँ
चुनौती बन वर्तमान मैं पुरूष वर्ग की जीना जानती हूँ।
अबला सबला जैसे विशेषणों को हटाना जानती हूँ मै॥
पुरूष वर्ग की कुंठित मानसिकता से निकल कर मै ॥
प्रतिभा पाटिल की तरह राज्य करना भी जानती हूँ मैं॥
मैं नारी हूँ

.

Views 30
Sponsored
Author
डॉ मधु त्रिवेदी
Posts 262
Total Views 2.6k
डॉ मधु त्रिवेदी प्राचार्या शान्ति निकेतन कालेज आगरा स्वर्गविभा आन लाइन पत्रिका अटूट बन्धन आफ लाइन पत्रिका झकास डॉट काम जय विजय साहित्य पीडिया होप्स आन लाइन पत्रिका हिलव्यू (जयपुर )सान्ध्य दैनिक (भोपाल ) सच हौसला अखबार लोकजंग एवं ट्र टाइम्स दिल्ली आदि अखबारों में रचनायें विभिन्न साइट्स पर परमानेन्ट लेखिका
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia