मैं घरौंदा रेत का

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- कविता

सागर सा तू विशाल, मैं घरौंदा रेत का l
निश्चित है परिणाम, इस जीवन के खेल का ll

उद्देश्य ढूंढता हूं, दो लहरों के दरमियां l
क्या सबब है यहां, तेरे मेरे मेल का ll

डूबती कश्ती भी देखो, आखिर क्या करे l
ढूंढता उस पर ठिकाना ,एक परिंदा दूर का ll

आती हुई लहरें सुना ,जाती भी हैं यहां l
छोड़ तट पर ढेर ,मोतियों के सीप का ll

छोटी सी उम्मीद ही "सलिल" तेरे लिए l
हौसला जो साथ ,बन जाए पत्थर मील का ll

संजय सिंह "सलिल"
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

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संजय सिंह
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मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

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