मैं कभी चाँद पर नहीं आता

Salib Chandiyanvi

रचनाकार- Salib Chandiyanvi

विधा- गज़ल/गीतिका

दिल पे कोई असर नहीं आता
याद तू इस क़दर नहीं आता

रात आती है दिन भी आता है
कोई अपना मगर नहीं आता

चाँद आता है बाम पर अब भी
बस मुझे ही नज़र नहीं आता

सारी दुनिया बदल गई होती
मैं अगर लौट कर नहीं आता

हम नमाज़ें क़ज़ा तो करते हैं
ख़ौफ़ दिल में मगर नहीं आता

मौत शायद इसी को कहते हैं
लौट कर जब बशर नहीं आता

ज़ेर-ए- पा मंज़िलें तो आती हैं
सिर्फ़ अपना ही घर नहीं आता

जब ज़मींपर सुकून मिलजाता
मैं कभी चाँद पर नहीं आता

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Salib Chandiyanvi
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मेरा नाम मुहम्मद आरिफ़ ख़ां हैं मैं जिला बुलन्दशहर के ग्राम चन्दियाना का रहने वाला हूं जाॅब के सिलसिले में भटकता हुआ हापुड आ गया और यहीं का होकर रह गया! सही सही याद नहीं पर 18/20की आयु से शायरी कर रहा हूँ ! उस्ताद तालिब मुशीरी साहब का शाग्रिद हूँ पर ज्यादा तर मैने फेस बुक से सीखा जिसमें मनोज बेताब साहब, कुंवर कुसुमेश साहब, मुख्तार तिलहरी साहब का बहुत बडा हाथ है !

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