मैं और तुम

प्रतीक सिंह बापना

रचनाकार- प्रतीक सिंह बापना

विधा- कविता

हम कुछ बिना सोचे समझे से हैं
तय किये बिना ही मिले से हैं

मैं और तुम दो कंधों से हैं
रोते हुए एक दूसरे को चुप कराने के लिए
कभी आराम करने को, कभी सुलाने के लिए

मैं और तुम धुंधले चित्र हैं
कुछ बताते नहीं, पर सब कुछ जताते हुए
यादें समेटे हुए हम, हंसाते रुलाते हुए

मैं और तुम जलती मोमबत्तियां हैं
जिनकी रोशनी में परछाइयां नाचती दिखती हैं
रोशन होते आशियाँ, नज़दीकियां बढ़ती दिखती हैं

तुम ही मेरे 'अंत' और तुम ही 'आरम्भ' हो
तुम मेरे 'कभी नहीं' और तुम ही 'हमेशा' हो

–प्रतीक

Sponsored
Views 22
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
प्रतीक सिंह बापना
Posts 38
Total Views 976
मैं उदयपुर, राजस्थान से एक नवोदित लेखक हूँ। मुझे हिंदी और अंग्रेजी में कविताएं लिखना पसंद है। मैं बिट्स पिलानी से स्नातकोत्तर हूँ और नॉएडा में एक निजी संसथान में कार्यरत हूँ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia