मैं इश्क करने आया हूँ ।

Govind Kurmi

रचनाकार- Govind Kurmi

विधा- शेर

इसारा कर ऐ जिंदगी, मैं कुर्बान होने आया हूँ ।

नफरत भरे दिल में, वफ़ा का तोहफ़ा लाया हूँ ।

भुला सके तो भुला मुझे, मैं गुमराह होने आया हूँ ।

पत्थरों के जमाने में, मैं शीशे का दिल लाया हूँ ।

ये एकतरफा ही सही, मैं इश्क करने आया हूँ ।

एक तेरी ही खातिर मैं, दुनिया छोड़ आया हूँ ।

मैं इश्क करने आया हूँ
मैं इश्क करने आया हूँ

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Govind Kurmi
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गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।

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