मैं आज़ाद नहीं

MANINDER singh

रचनाकार- MANINDER singh

विधा- कविता

मैं आज़ाद नहीं,
अपनी सोच का गुलाम हु,
अन्धविश्वाश, रीतिरिवाज़ों में,
डूबा हुआ बिखरता जाम हु,
बिन मांगे दुसरो को,
देता सलाहों का पैगाम हु,
मुझसे बेहतर कोई नहीं,
सोच लिए अपने आप में,
सफल मुकाम हु,
देख किसी को पड़े मुश्किल में,
राह बदल, सुन कर अनसुना,
करने वाला इंसान हु,
चोरी कर महसूल,
समस्याओ का ढिंढोरा,
पीटने वाला अवाम हु,
जीतकर लोगो से किये,
वादे ना पूरा कर छुपने,
वाला नाम हु
ये मेरा काम नहीं,
मैं क्यों करू?
किसी बेबस बताने वाला,
उसकी बेबसी का दाम हु,
किताबो को मोड़ कर,
पैंट में अड़ा,
आशिकी की चाह लिए,
सडको पर घूम रहा,
देश का मान हु,
पाठशाला में गैर हाज़िर,
घरो में पढ़ाने वाला विद्वान हु,
बेटी को पेट में मार,
लड़का लगाएगा बेड़ी पार,
झूठा अभिमान हु,
सच कहु अपने आप में डूबा,
समझ होते हुए बे समझ हो जीता इंसान हु,
आज देखा मैंने दिल के झाक कर,
मैं आज़ाद नहीं,
अपनी स्वार्थ भरी सोच का गुलाम हु,

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MANINDER singh
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मनिंदर सिंह "मनी" पिता का नाम- बूटा सिंह पता- दुगरी, लुधियाना, पंजाब. पेशे से मैं एक दूकानदार हूँ | लेखन मेरी रूचि है | जब भी मुझे वक्त मिलता है मैं लिखता हूँ | मशरूफ हूँ मैं अल्फ़ाज़ों की दुनिया में....... cont no-9780533851

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