मेरे 20 सर्वश्रेष्ठ दोहे

महावीर उत्तरांचली

रचनाकार- महावीर उत्तरांचली

विधा- दोहे

ग़ज़ल कहूँ तो मैं 'असद', मुझमे बसते 'मीर'
दोहा जब कहने लगूँ, मुझमे संत 'कबीर' // 1. //

युग बदले, राजा गए, गए अनेकों वीर
अजर-अमर है आज भी, लेकिन संत कबीर // 2. //

ध्वज वाहक मैं शब्द का, हरूँ हिया की पीर
ऊँचे सुर में गा रहा, मुझमे संत कबीर // 3. //

काँधे पर बेताल-सा, बोझ उठाये रोज़
प्रश्नोत्तर से जूझते, नए अर्थ तू खोज // 4. //

विक्रम तेरे सामने, वक़्त बना बेताल
प्रश्नोत्तर के द्वन्द्व में, जीवन हुआ निढाल // 5. //

विक्रम-विक्रम बोलते, मज़ा लेत बेताल
काँधे पर लाधे हुए, बदल गए सुरताल // 6. //

एक दिवस बेताल पर, होगी मेरी जीत
विक्रम की यह सोचते, उम्र गई है बीत // 7. //

महानगर ने खा लिए, रिश्ते-नाते ख़ास
सबके दिल में नक़्श हैं, दर्द भरे अहसास // 8. //

रेखाओं को लाँघकर, बच्चे खेलें खेल
बटवारे को तोड़ती, छुक-छुक करती रेल // 9. //

मन्थन, चिन्तन ही रहा, निरन्तर महायुद्ध
दुविधा में वह पार्थ थे, या सन्यासी बुद्ध // 10. //

सच को आप छिपाइए, यही बाज़ारवाद
नैतिकता को त्यागकर, हो जाओ आबाद // 11. //

वहाँ न कुछ भी शेष है, जहाँ गया इंसान
पृथ्वी पर संकट बना, प्रगतिशील विज्ञान // 12. //

चुप्पी ओढ़ी शाम ने, कर्फ़्यू बना नसीब
दस्तक देती गोलियाँ, लगती मौत करीब // 13. //

कितने मारे ठण्ड ने, मेरे शम्भूनाथ
उत्तर सभ्य समाज से, पूछ रहा फुटपाथ // 14. //

गीता मै श्री कृष्ण ने, कही बात गंभीर
औरों से दुनिया लड़े, लड़े स्वयं से वीर //15. //

हथियारों की होड़ से, विश्व हुआ भयभीत
रोज़ परीक्षण गा रहे, बरबादी के गीत //16.//

महंगी रोटी-दाल है, मुखिया तुझे सलाम
पूछे कौन ग़रीब को, इज्ज़त भी नीलाम //17.//

महंगाई प्रतिपल बढे, कैसे हों हम तृप्त
कलयुग का अहसास है, भूख-प्यास में लिप्त //18.//

सबका खेवनहार है, एक वही मल्लाह
हिंदी में भगवान है, अरबी में अल्लाह // 19. //

होता आया है यही, अचरज की क्या बात
सच की ख़ातिर आज भी, ज़हर पिए सुकरात // 20.//

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महावीर उत्तरांचली
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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार

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