मेरे क़त्ल की ख़बर

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- कविता

मेरे क़त्ल की ख़बर किसी को पता क्यों नहीं,
उनकी बेरुखी ने मुझे जिन्दा तो नही छोड़ा।
**** ****
जिस दीपक के उजियाले से तेरा चेहरा रोशन होगा,
उस दीपक के नूर की ख़ातिर हैं ये शमां जलाए है,
काश कोई हमको बतला दे,
तेरी आँखों के दीपक में कितने राज़ समाए है।
**** ****
कहाँ गई उनके चेहरे की मासूमियत,
अब तो उनकी आँखों से ही डर लगता है।
रात को कब्रगाह का सन्नाटा कुबूल है,
पर हमें ख़ुद की साँसों से भी डर लगता है।
**** *****
उनसे जी भर के कभी रूबरु न हो सके
जिनसे ख़्वाबों में मिले बिना सहर नहीं होती।

Views 36
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
विनोद कुमार दवे
Posts 43
Total Views 3.3k
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia