** मेरे महबूब की आँखों में **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

****🎂🎂🎂***
मेरी महोब्बत को ना परखो ऐ नाजनीनो-2
लग ना जाए इसको अब तुम्हारी ये नज़र ।।
***💐💐💐*******
मेरे महबूब की आँखों में
उतर आया है प्यार मेरा
अब ललचाई आँखे से
ना देखो-2 प्यार मेरा
लग ना जाये तीरे-निशां
कुछ तो सोचो समझो
मासूम है दिलदार मेरा
भरी महफ़िल में
लाचार है दिलदार मेरा
दुनियां वालों कुछ तो
कर लो एतबार मेरा
मत चीरो नज़र से तुम
मासूम है प्यार मेरा
कत्ल करना है तो
कर दो मुझको, नही
गुनहगार है यार मेरा
मेरे महबूब की आंखों में
उतर आया है प्यार मेरा ।।
👍मधुप बैरागी

Views 26
Sponsored
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 277
Total Views 3.7k
मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia