“मेरे मन मीत “

किरन मिश्रा

रचनाकार- किरन मिश्रा

विधा- कविता

हाँ तुम चाँद हो मेरी रातों के !
तुम्ही ख्वाब,मेरी नींदों के !
शहद हो तुम,मेरी बातों में !
गुलाब बन महकते हो,मेरी यादों मे !
खिलते हो कमल मेरे होंठों पे !
मुस्कराते हो सूरज,मेरी आँखों में !
तुम्हारी खुशबुओं से,खिल उठती हूँ
मैं कली सी!
साथ तेरा जगमग दीवाली !
होली के रंग,जीवन में बिखरे !
शामें क्षितिज,चेहरे की लाली !
मेरी हँसी,मेरी खुशी,मेरे सुख,मेरे दुख,
मेरे साथी,मेरे सखा,
मेरे गीत जीवन संगीत,
हाँ तुम्ही तो हो,यारा,मेरे मन मीत !!""
किरण मिश्रा
5.2.2017

Sponsored
Views 58
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
किरन मिश्रा
Posts 4
Total Views 2.4k
"ज़िन्दगी खूबसूरत कविता है,और मैं बनना चाहती हूँ इक भावनामयी कुशल कवियत्री" जन्म तिथि - 28 मार्च शिक्षा - एम.ए. संस्कृत बी. एड, नेट क्वालीफाइड, संप्रति- आकाशवाणी उद्घघोषिका(भूतपूर्व) प्रकाशित कृति- साँझा संकलन "झाँकता चाँद"(हायकु) विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित अनेकानेक रचनायें !

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia