,,,,मेरे दिल के अल्फाज,,,,

मानक लाल*मनु*

रचनाकार- मानक लाल*मनु*

विधा- शेर

,,,,मेरे दिल के अल्फाज,,,,

1-कभी हम ने वक़्त को न समझा,,,,
आज वक़्त हमको नही समझ रहा,,,,
और हम है कि इल्जाम उस दिलनाज पे रहे है,,,

2-मानता हूं कि गुन्हेगार हु तेरा,,,,
मगर इतना मुँह न खोल मेरे खिलाफ राजदार भी हूँ तेरा,,,

3-तेरा होके किसी और का होने को कहा जी चाहता है,,,
ये दुनिया बहुत सोचती है कि ये मनु क्यो इसी को चाहता है,,,

4-आज तो न जाने कैसे कैसे हालत हो रहे है,,,,,
में सोने को हूँ और दोस्तो के सवालात हो रहे है,,,,

5-इतनी भी नादन और अनजान नही हूँ की आपकी धड़कन और साँसों की सरगर्मी न समझू,,,
6-बर्फ कितना कड़क हो जाये ,,,,
आखिर में पानी ही होना है पानी को,,,

8-में दूर हो नही सकता क्यों कि किरदार हूँ उसकी कहानी में,,
वो आये तो लगा कि कुछ मिला इस जिंदगानी में,,,,

9-मेरी रजा से क्या होने बाला था,,,,
इस दिल की हर जगह पर तो सिर्फ उसका ही बोलबाला था,,,,

10-बताओ तो सही तुम्हारी वो अदा कहा गयी,,,,
दरवाजे के पीछे से भी तुमने मनु को अपना बना लिया था,,,,
मानक लाल मनु,,,,
सरस्वती साहित्य परिषद,,,,,

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मानक लाल*मनु*
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सरस्वती साहित्य परिशद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,

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