मेरी वाणी को झंकार दे दीजिए

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

बंजरों में भी जल धार दे दीजिए
निर्बलों को भी कुछ प्यार दे दीजिए

जल न जाये कहीं फिर घरौंदा कोई
मेरे जीवन का भी सार दे दीजिए

नारी खुद ही बनें लाज की रक्षिका
उनके हाथों में तलवार दे दीजिए

अब बहू बेटियाँ भी जिएँ शान से
एक खुशियों का संसार दे दीजिए

काँप जाये हृदय अरि दलों का अभी
हर दिशा को वो हुंकार दे दीजिए

मोर मन के उठे झूम "प्रीतम" सभी
मेरी वाणी को झंकार दे दीजिए

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
18/09/2017

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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