मेरी रूह

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- अन्य

(1)🌹🌹🌹🌹
मेरी रूह मुझे छोड़ गई….
मेरे हाथों से निकलकर
तेरी यादों से लिपट गई…..
🌹🌹🌹🌹🌹

(2)🌹🌹🌹🌹
मेरी रूह मेरी जिस्म
छोड़ कर चली……..
तेरी यादों की खुश्बू में
तितली बनकर उड़ी…..
🌹🌹🌹🌹🌹

(3)🌹🌹🌹🌹
तेरा अक्स
मेरी रूह में समाया है,
खुश्बू बन
मेरे ख्यालों को महकाया है।
मैं अब मैं ना रही,
बन गई जिस्म तेरा साया है।
🌹🌹🌹🌹🌹-लक्ष्मी सिंह💓☺

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लक्ष्मी सिंह
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