मेरी बेटियाँ

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

मेरी अन्तर मन से निकली,
है मेरी पहचान बेटियाँ ।
जिस दिन मेरी गोद में आई,
जीवन बना महान बेटियाँ ।
तेरी नन्ही – सी कदमो से,
घर आँगन मुस्कान बेटियाँ ।
पाकर तुमको धन्य हुई मैं,
जी ली तुझ में बचपन बेटियाँ ।
मेरे सुने मन मंदिर में,
बन कर आई सुन्दर गान बेटियाँ ।
मेरे दिल की धड़कन है तू,
तू ही मेरी जान बेटियाँ ।
तुम में रूप अनोखा पाया,
तुम मेरी अभिमान बेटियाँ ।
धर्म – मर्यादा सींच दूँ तुम में,
रखना घर की मान बेटियाँ ।
कभी किसी से कम मत रहना,
बनना गुण की खान बेटियाँ ।
नाम मेरी तुम रौशन करना,
बढाना मेरी शान बेटियाँ ।
लक्ष्मी सिंह

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 247
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
लक्ष्मी सिंह
Posts 174
Total Views 79.5k
MA B Ed (sanskrit) please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia