मेरा हमदम आज…..

तेजवीर सिंह

रचनाकार- तेजवीर सिंह "तेज"

विधा- गज़ल/गीतिका

🌹🌻 ग़ज़ल 🌻🌹

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

मेरा हमदम आज मुझको वो निशानी दे गया।
टूटती साँसों को जैसे ज़िंदगानी दे गया।

प्यार का प्यासा पथिक मरुथल में था भटका हुआ।
झील-सी आँखें मिला कर शादमानी(ख़ुशी) दे गया।

आस का सागर हिलोरें दिल में यूँ लेने लगा।
कोई आकर ज्वार-सा उसको रवानी दे गया।

मुस्कुराई रात बनके रातरानी अधखिली।
नैन में बसके कई यादें सुहानी दे गया।

राज़ के पर्दे हटाकर बो गया कुछ ख़्वाब भी।
होंठ होठों से मिला नूतन कहानी दे गया।

सुरमयी-सी साँझ में रतनार-से नैना हुए।
भर मुझे आगोश में दौलत रूहानी दे गया।

ये ग़ज़ल अब जिंदगी की दास्तां होने लगी।
गुनगुना कर वो इसे फिर धुन पुरानी दे गया।

प्यार के इक *तेज़* झोंके में
ढहा मेरा क़िला
जाते-जाते मेरे हक़ में वो बयानी दे गया।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
तेजवीर सिंह "तेज"

Views 4
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
तेजवीर सिंह
Posts 75
Total Views 880
नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती शारदा देवी शिक्षा - एम.ए.(द्वय) बी.एड. रूचि - पठन-पाठन एवम् लेखन निवास - 'जाट हाउस' कुसुम सरोवर पो. राधाकुण्ड जिला-मथुरा(उ.प्र.) सम्प्राप्ति - ब्रजभाषा साहित्य लेखन,पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन तथा जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन कार्य।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia