मेरा सनम मुझको आज हंसाने आया था

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

मेरा सनम मुझको आज हंसाने आया था
जिसने मुझको ही बहुत कल रुलाया था

जहाँ में मेरा भी यारों अब नाम हो गया है
फ़कत किसी की मुहब्बत ने यह कराया था

कमजोर नहीं दिवारें हैं मेरे घर की जान लो
बड़ी ही जतन से मैने घर ये बनाया था

माँ की दुआ से ही यार आबाद रहा हरदम
छू ना सका मुझे कोई बुरा जो साया था

उझर गया है आशियाँ किसी की बेवफ़ाई से
कँवल ने प्यार से बड़े ही जिसे सजाया था

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जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)

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